किमंतवाला बाजार
बाल्कनी की सत्तावीसवी मंजिल पे सूरज के किरणों का पहेरा सुबह के उस मौसम को और ही लुभावना बना रहा था। कॉफीसे भरे हुऐ कप से निकलती हुई खुशबू को अपने सांसो मैं भर कर शौर्या अपने घुंघराले बालो को सवारते हुऐ संमदर का नजारा देख ने मे खो गई थी। अपनी ही दुनिया मे रहने वाली शौर्या को ये सुबह के पुरसत के चार लम्हें न जाने दफतर में दिनभर काम के लिए सूर्फ्ती देने के लिए काफी थे। वाकीयां तो रोज का ही था। वही रोज के रास्ते का ट्रैफिक, मध्यम होती सूरज की किरने, वही कम-जादा होनेवाली समुदर की लहरे …. अब उसे इन सब की आदत सी हो गई थी। फिर भी हर-एक दिन नया सा लगता था।
ऑफिस की वही रोज की जिदंगी…. अपनी टारगेट को ध्यान में रखे… बॉस के गुड लिस्ट मे रहो… out of the Box….. की सोच को याद रखकर अपने आपको दुसरो से अलग रखने की सलाह लेते रहना। और वही गिस्सी-पिटटी लेक्चर को सुनते रहो… ‘सूरज ओटोमाबाईल्स’ मे उसे पाच साल हो चुके थे। H.R. Manager की पोस्ट मिलने से तो जिम्मेदारी और बढ गयी थी।
“शौर्या ये simiLabs कंपनी की annual Report का प्रिटं कही देखा क्या ?“… सत्तावीसवी मंजिल की 2BHK की फ्लॅट मे शौर्या पिछले साल से रहने आ गयी थी हालाकी फ्लॅट लोन से जरुर लिया था फिर भी उसे खूद पे बहूत नाज था की मुबंई जैसे शहर मे खुद के दम पे मकान तो हासिल कर लिया था। और सिर्फं बेटी की जिदद पे पी. रामचंद्रन हफ्तेभर के लिए ही सही मुंबई मैं अपनी एकलौती संतान के घर आये थे। “हा माना के आप fund Manager हे, बडी कंपनी के पर…. आप यहा भी शुरु हो गये… वो कुछ नही आप यहा बैठे.. और बेटी ने नया घर लिया है और आप तारीफ करने के बजाएं आप अभी भी काम मैं फसें है” शौर्या ने थोडा गुस्सा लाकर चिल्लाते हुऐ कहा। रामचंद्रनजी ने अपनी मिली हुई प्रिटं-आउट को टेबल पर रख दिया… रामचंद्रनजी वाकई मै ही एक नायाब इंसान थे अपनी 23 साल की करियर मे एक कामयाब “fund Manager” के हसियतसे खूब नाम कमाया था।
और अपनी एकलौती संतान से भी अपनी ही तरह कामयाब् हो यही मनिषा रखते थे। और उने ये उम्मीद थी की वो जरुर कामयाब होगी। “बेटी मे देख रहा हू की तुम इतनी बिझी रहती हो अपने काम मैं, क्या तूम खुद को समय दे पाती हो?”, “देखो बेटा जिदंगी जिने का शौक होना चाहिए उसके साथ आनेवाली जरुरतो का नही !” रामचंद्रनजी हर बार सलाह के तौर पे, थोडा सा बेचैन हो कर शौर्या को समजाने की कोशिश करते। और शौर्या हर वक्त “पापा, मे खुश हू, हा कभी-कभी काम से बोर हो जाती हू ….पर ठीक है… चलता है।” कह कर बात को रफादफा कर देती थी।
दीवार पर लगी अपनी बीवी की तस्वीर देख कर रामचंद्रनजी की आखो मे आंसू आ गये। “लगता हे तूम रोज इस तस्वीर को हार पहनाती हो”, शौर्या की माँ का दो साल पहले ही देहान्त हो चुका था। “हा माँ की बहोत याद आती है” शौर्या नी थोडे से दबे आवाज मे आंसू न आने की कोशिश करते हुए कहा। "शायद मुझे परवरिश का मतलब अब समझ आ रहा है, करियर की रेस मे ना में तुम लोगो को समय दे पाया ना खुद को, तुम्हे शायद मालूम नही होगा पर स्टॉक मार्केट में मुझे easy decision maker कहा जाता है। पर तुम्हारी माँ को जब कॅन्सर होने की बात बतानी थी तब मुझे पता चला के मे कितना कमजोर दिल इसांन हू"। माहौल काफी गंभीर हो चुका था। “मुझे एसा नही लगता पापा… आप जो भी कर रहे थे हमारे लिए तो कर रहे थे और आज भी कर रहे है। और माँ अभी भी हमारे साथ है। आज वो भले ही दुनिया से चली गई हो … पर वो हमारे दिल मे जरुर जिदां है।” शौर्या अपने आसूं वो को रोक न पाई। शौर्या ने वातावरण को पलटने के लिए ऑफिस की बात निकाल दिई। ये C.E.O. लोग भी अजीब होते हे, हर पंधराह दिन के बात ये “out of the box thinking” वाली बात करके निकल जाते है। Implement तो हमे ही करना पडता है ना। और इस बार H.R. Department मे कुछ नया होने वाला है। रामच्रदंनजी ने मुस्कारते हे “Rat race है, वैसे मुझे भी एसा ही कुछ करना पडता है। हा पर मुझे ये सब financial चीजों के लिए करना होता है।”
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“नही! ये फायनल … ही है.. C.E.O. की केबिन में फैसला हो चुका था। एक-एक करके लोग बाहर आगऐ। शौर्या थोडी सी नाराज ही थी.. फैसला ही कुछ अजीब सा था। H.R. की केबिन का माहौल कुछ अब Air Traffic Controller की तरह बनने वाला था। क्योंकी इन्टरव्हूयं के लिए आनेवाले उमेदवारो के लिए बनाऐ हुऐ हॉल मे ऑडियो-वीडियो वाले कॅमेरा लगाने का निर्णय हो चुका था और एच.आर. टीम को उनकी हरकतो और बातो पर गौर करते हुऐ रिपोर्ट बनाकर उपरी मॅनेजमेंट को भेजना था। “यार एच.आर को सिर्फं यही काम है क्या?
बंदे की बॉडी-लॅगवेज चेक करो..” शौर्या की साथी नताशा ने पुरे दुःख भरे स्वर से कहा। “चलो ठीक है थोडा रुटीन से हटके तो है” शौर्या ने जबाब में कहा। “हा पर इस बार पुरे 30 नये बंदो को hire करना है। और वो भी कस्टमर केअर डिपार्टमेंट में “only good communication” वाले ही चाहिऐ। नताशा और ही परेशानवाली आवाज कह रही थी। “हा मॅडम नताशा पता है“ शौर्याने हामी भरते हुऐ हसते कहा।
“तो ठीक है ना सब… ऑडियो-वीडियो सिस्टीम…. क्यूकी मुझे मेल लिखना है” शौर्या ने नताशा से पुछा। हा…कन्फर्म है नताशा ने कह दिया। शौर्या नताशा की सिनिअर जरुर थी, पर दोनों की दोस्ती भी काफी बढिया थी। “एक्चुअली में ने मेल ड्राफ्ट कर के रख दिया है “ नताशा ने मुस्कुराते हुऐ कह दिया। “पर तुमने खुद चेक कर लिए है ना… ?” शौर्याने थोडे संदेह होते हुऐ कहा। “मैने खुद एडमिन सुमेध् से कन्फर्म किया है” नताशा ने पूरे आश्वासक स्वर से कह दिया। “आजकल इस सुमेध पे कुछ ज्यादा ही भरोसा कर रही हो …” शौर्या ने टोकते हुऐ कहा। एसा कुछ नही है…नताशा ने गुस्सा लाकर कहा। “मैनें कब ऐसा कहा… चलो मेंने मेल सेंन्ड कर दिया है…. कभी हो जाए तो बता दे ना” शौर्या ने फिरसे एक बार मुस्कराते हुऐ नताशा को टोक दिया। “शौर्याक्की बच्ची देख लुगी तुझे” नताशा ने गालो पें आई लाली को छुपाते हुऐ शौर्या की हातो को पींच करते हुऐ कह दिया।
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“बेटा ये इटंरनेट कनेक्शन बंद है क्या? रिपोर्ट तो पढ चुका था.. “दिन मैं दो-तीन बार देख चुका हू पर नो कनेक्श्न बता रहा है। मेरे मोबाईल को भी नेटवर्क नही मिल रहा है। “ शौर्या के आते ही रामचंद्रनजी ने अपनी गुहार लगा दिई। शौर्या ने सी.पी.यू के पीछे वाली प्लग को ठीक से लगाकर मुस्कराते हुऐ कहा “कभी कभी solution अपने पास ही होता हे हम बस उसके आसपास नही देखते ।” और जैसे ही नेट कनेक्शन ऑन हो गया तो शौर्या अंदर चली गई। “एक बार company history” चेक कर लू। सब कुछ ठीक लग रहा है, मेरी खुद की calculation भी सही है, बस अब समय तय करना है कब कंपनी में निवेश करना है।“ रामचंद्रनजी ने
अपने आप से ही बात कर रहे थे। “सुमा, आज खाने में क्या बनाया है” शौर्याने घर में खाना बनाने आनेवाली सुमासे पुछा।…. भेंडी की सब्जी है और चावल बना या है, सब रेडी करके रख दिया है शौर्याताई… चलो मैं चलती हूं ” सुमा ने गॅस बंद करते हुऐ कहा। मुझे भी घर पे जाकर खाना बनाना है और फिर सिरियल देखना है। सुमा सामनेवली ही झोपडपटटी में अपने दो बच्चों और पति के साथ रहती थी। सुमा के घर पें टी.व्ही. आकर एक साल हो गया था और उसे सिरियल देखने की आदत लग गई थी।परिवार को मदत करने के लिए पिछले छह महिनों से शौर्या के यहा खाना बना ने आ रही थी। शौर्या को सिरियलवाली बात सुनकर बडी हंसी आ रही थी। “अच्छा वो तुम्हारी उस सिरीयलवाली सुजाता को बच्चा हुआ के नही” शौर्या ने टोकने के इरादे से कह दिए। “अभी तक तो नही, मेरे सोहम का भी बंडे मना के एक साल होने को आएगा फिरसे अगले महिने आ जायेगा पर इनका एपिसोड का एपिसोड नही आगे बड रहा है ”, “और ये लोग एसा भी नही की कोई त्योहार नही छोडते हर त्योहार मनाते है दिवाली, ईद हो या खिरसमस…. फिरभी इनके नऊ महिने कंपलीट नही होते” सुमाने अपनी चप्पल पहनते हुऐ कहा। “शौर्या अपनी हंसी रोख नयी पाई “अरे वो सब अक्टीगं होते है वो कोई सच नही होता है”। “मालूम है ताई वो सब नाटक करते है” सुमाने जबाब में कहा। “चलो रामचंद्रनजीकाका, निकलती हूं, शौर्या उनको बोलोना की थोडा बाहर घुमा करे …मुबंई आऐ हे तो पुरा मुबंई-दर्शन तो करे…” सुमाने शौर्या को कहा। “आज तुम्हें सिरीयल देखनी नही है क्या?” शौर्याने गुस्से में आकर कहा। “जाने दो गया एक एपिसोड तो जायेगा और वसें भी सोहम के पापा भी चायनीज भेल का ठेला बंद करके आने में रात के बारा बजही जाते है मुझे फिरसे रीपीट टेलिकास्ट देखना पडता है”। सुमाने दरवाजी की और बढते हुऐ कहा “शौर्या चलती हू, चलो काका”…… बहोत बोलती है ये सुमा…. हा…हा…वा क्या तरक्की होता है… जिदंगी जिने का… कल की कोई फिक्र नही… ऐसा लगता है के ये हर पल जिते हे ये लोग… हमे भी इनसे थोडासा पागलपन, बेडरपन लेना चाहिए… हमे तो बस हर पल कल की पडी रहती है… शायद ये लोग पैंसे से कमजोर है पर इनके पास वो झिरो है उसके लगते ही सब आसान लगता है कल को लेके कोई शिकवां नही होता…”। हमारे पास भी झिरो होता है पर हर कोई उसकी किमंत नही जानता और जब तक जान ले तब तक दुनिया आपकी अलग किमंत लगा चुकी होती है और आप भी बस उसे टिकाने में लगे रहते हो। रामचद्रंनजी को न जाने सुमा की बातें ने जिदंगी की पहेली को सोच ने का नया नजरया दे दिया था।
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“हमे लगता हे के बस कनसेप्ट नया है और जब तक उसे अच्छी तरह मॉनिटर ना किया जाएं और ढंग से इपलिमेंट ना हो आप लोगो को ग्रासरुट लेवल पें जाके काम करना होगा….” बॉस की नयी सूचनाएं शौर्या और उसकी को-वर्कर नताशा सुन रहे थे। हालाकिं बॉस की ये सारी लेंक्चर परदेश बैठे कॉन्फरस विडोयो कॉल से हो रही थी तो शौर्या और नताशा उसे सिर्फं चहरे पे गंभीर मुद्रा लेकर एक दुसरे को पीचं करके वातावरण को हलका कर रही थी। “चलो लेक्चर तो खत्म हुआ.. अब हमे ही जाकर इन्टरव्हू प्रोसेस को कंडकट करना होगा… बॅक टू द रुट नताशा” शौर्याने हसंते हुऐ कहा।
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“अरे यार बस जितना कल रात को रटटा मार दिए था वही जा के बक देने का और हमेशा पॉसिटीव्ह वाली बाते करना कोई जबाब ना आये तो सीधा बोल देना की नही मालूम उलटा-सीधा मत बोल देना” सोहेल अपने इन्टरव्हूसे बाहर आते ही अपने दोस्त रंजित को समजाने लग गया। अगल-बगल में बैठे और दो-चार लोगोने सोहेल से सवाल करने शुरु कर दिये… “कुछ नही यार और दो राऊंड बाकी है।” सोहेल ने जादा कुछ एक्साइटमेंन्ट न दिखाते हुए रंजित को समजाने लग गया। और यहां पे शौर्या अपनी मायक्रोफोन को थामे हुऐ इन सबकी बातें सुन रही थी। सुबह 10 बजे शुरु होने वाले इन्टरव्हू के लिए उमेदवारोंसे हॉल पूरा भर चुका था। कई लोगो को तो प्राफाईल फॉर्म भरने में ही दिक्कते हो रही थी। शौर्या हसं-हसंके पागल हो गई। “एच.आर. मॅनेजर अंदर बेठी हे हेडफोन लगा के… क्या मालूम गाना सून रही होगी। पर यार क्या दिखती है वो। साले ज्यादा उसकी तरफ eye contact मत करना, तेरी achievement खत्म हो जाएगी ” सोहेल रंजित को हंसते हुअए बाते बताने में मश्गुल था "और वो मॅनेजमेंट का Definition भी याद रखना…"। रजितं को इन्टंरव्हू के लिए अंदर बुलाया गया। अब हर लडके ने सोहेल से पूछना शुरु कर दिया।
रंजित का दुःखी चेहरा देखकर सोहेल समज गया। “…अरे भाई..“ रंजित बताने लगा। अरे जिसने अभी भी इन्टरंव्हू दिया उसे पे कॅमेरा लेना शौर्याने नताशा से कहा। “लग गई यार… तेरे भाई की .. फेल यार कन्फर्म .. मेरे तो अंग्रेजी ग्रामर की लग गई सोहेल.. हा पर वो एच.आर. मॅनेजर क्या दिखती है भाई एक ही बार नजर गई मैं तो पूरा मॅनेजमेट का एम भी याद न कर पाया” रंजित ने सोहेल से कहा। “पर यार तू करले जाईन ये कंपनी ग्रोथ् भी है और पॅकेज भी अच्छा है उपरसे इतनी हॉट एच.आर. मॅनेजर” रंजित ने थोडे दुःखी स्वर से कहा। “जाने दे शौर्या बच्चे है, थोडी बहोत कमेंट तो कॉमन है और वसे भी ये सब उन्हों ने मूह पें तो नही कहा है ना” नताशा ने शौर्या को आये गुस्से को देखते हुऐ कहा। शौर्या ने अपना मायक्रोस्पीकर कान से हटा के जोर से डेक्स पे पटक दिया।
“चलो तीनो राऊंड तो खत्म हो गये। तूम वो worksheet चेक कर लेना” मै इन्टरंव्हू का रिझल्ट डीक्लर करने जा रही हू नताशा ने शौर्या को मायक्रोफोन को फिरसे हाथ मे देते हुऐ कहा। मुकेश तलवार, राहूल बखार, इस्माल बरेलीवाले,… सौम्या पंकज और सोहेल परदेसी… all are selected. “जो सोचा वही हुआ” रंजित थोडसे हसते हुऐ सोहेल की तरफ अभिवादन के लिए हाथ आगे करते हुऐ कहने लगा। सोहेल ने भी हामी भरकर खूशी से मुस्कारा या। इधर शौर्या ने अपना पटका हुआ मायक्रोफोन फिरसे कानो को लगते हुऐ worksheet को चेक करने लगी।
“मॅडम वो रिजेक्ट होने की वजह क्या बता सकते हे आप, ताकिं में नेक्स्ट-टाईम उसे सुधार कर सकू” रंजित ने एच.आर. रुम में जाते नताशा को रोकर पूछा। नताशा ने अपने हाथ में थामे हुऐ पेपरो को ठीक करके कहा “communication को सुधारो और थोडा इन्टरव्हर को टोकना कम करो ताकि नेक्सटटाईम मॅनेजमेंट का एम ठीक से याद रहे…” नताशा की इस बात पर, न जाने क्यूं रंजित को गुस्सा आ गया.. नताशा ने selected candidate को joining document बता कर निकल गई। एच. आर. रुम में आकर शौर्या का मायक्रोफोन देखकर खुदभी कानो में मायक्रोफोन लगाकर डेस्क्टॉप की तरफ देखने लगी।
“अरे झक मारता ऐसे नोकरी को… अच्छा हुआ सिलेक्ट नही हुआ… मुझे कहती है communication सुधारो” वो एच.आर. मॅनेजर उसका खुदका इतना अच्छा communication skill है तो वो क्या कर रही है। किसी के कंपनी मे काम ही कर रही है ना। मेरा अगर एसा personality और communication होता तो में खुद का दफतर डाल देता था। रंजित अपने गुस्से को काबू ही नही कर पा रहा था। सोहेल ने उसे किसी तरह समजा कर उस कंपनी से बाहर लेकर आ गया।
रंजित की बाते जैसे शौर्या के कान से ही चिपकर रह गए थी। वो दिमाग से जाने के लिए तयार ही नही थी। पूरा चेहरा उतर पडा था। नताशा बात को समज गयी थी। “अरे उनकी दुनिया ही वही होती है। जितना देख ते है उतना ही सोचते है। कमसे कम लंच तो करले ” नताशा ने शौर्या को समजाने मैं लग चुकी थी। पर शौर्या को बात शायद बहुत ही अंदर तक घर कर गई थी। “मेरा अगर एसा personality और communication होता तो में खुद का दफतर डाल देता था” ये कडवा सच था इसलिए चुभ रहा था या फिर किसी ने मेरे ego को hurt कर दिया था…. या फिर नताशा के कहने की तरह ये बस उसकी सोच थी…., जो मैं एक महिने मे कमाती हू इसे तो बरसो लग जाएगे…. शौर्या का मन उसे और ही और सलाह दे रहा था। शौर्या का काम करने में मूड ही नही लग रहा था।
अरे… चलो मे आज जल्दी निकलती हू। शाम के चार ही बजे थे। शौर्या ने अपना बॅग भर दिया। नताशा ने भी जादा आगे पीछे न करते हूऐ उसे जाने दिया। रोज सात-साडेसात बजे निकलने वाली शौर्या को आज चार बजे कार पार्किंग भी अलग रहा था। गाडी स्टार्ट ही कर लिए थी… पुरे दिनभर की थकान ड्राइविंग करके उसे रिफ्रेश कर देती थी पर आज न जाने उसका मन लगी ही नही रहा था।
कॉर्नर की साईड से कार-पार्किंग में लगभग सामने दो सुट-बूट पहने हुऐ लोग आपस मे बात करते हुऐ…
शायद एक पच्चास की उम्र का आदमी और दुसरा करीब तीस की उम्र का… शौर्या ने हॉर्न बजाकर गाडी की स्पीड बढाते हुऐ सामने वाले उन आदमीयों को गाडी की आने का इशारा दे दिए। कार को देखते ही दोनो ने रस्ता देने के हेतू से पलट के सामने की और गाडी की तरफ मुड गये। कार भी अपने पूरे स्पीड में आगे निकल गयी। और पिछे से जोर से चीलानेवाली आवाज आई … शौर्या …शौर्या… अरे वो वही सुट-बूट वाला तीस साल के करीब उम्रवाला नौजवान… गाडी रुक गई। शौर्या ही होना… अपनी दौड को रोक ते हुऐ सांसो को छोडते हुऐ सुट-बूटवाले आदमी ने पूछा। “हा शौर्यां ” शौर्या ने थोडासा सिमित मन से कहा। “मायसेल्फ ब्रिजेशप्रसाद कुमार! पहचाना” अपना हाथ सेकंड के लिए आगे बडा थे हुऐ कुमार ने कहा। “नही” शौर्या और ही कनफयूज हो गई। “नही पहचाना अहो हो बिलंदरसिंग”… अरे तुम्हारा क्लासमेंट वही तुम्हारे और तुम्हारे सहेलीयो का टिफिन चुराकर भागनेवाला… नही… वही जो पीछली बेचं पे बैठ के मूगंफली मारनेवाला… नही… और तुम्हारे answer देख के एक्झाम पास होने वाला.. पहचाना… अपनी सांसो को और जोर देते हुऐ उस बिलंदरसिगं उर्फ बिज्रेशप्रसाद कुमार ने अपनी पहचान बताई और फायनली शौर्या उसे पहचान गयी …. OMG …बिलंदर तुम..सॉरी बिज्रेश..यार कितने बदल गए हो तुम.. और ये दाढी..भी बढा के रखी है। पर तुमने कैसे पहचान लिया…शौर्या ने मुस्कराते हुऐ पूछा। “तूम्हारे पेपर से कॉपी करता था इसका मतलब बुददू था ऐसा नही होता… बस तुम्हारा पुराना बॉबकट कही नजर नही आ रहा है, पुरा हेअरस्टाईल चेंज कर दिया..शौर्या” बिज्रेशने हसते हुऐ कहा। शट-अप बिज्रेश… शौर्या ने मुस्कराते हूऐ कहा… बाकी शादी वैगरा हुई के, नही… बिज्रेशने शौर्या को छेडने के बहाने कह दिया। “मुझे लगा था हमे मामा कहने वाला कोई तो हो…हा हा.. वैसे यहा कैसे? बिज्रेशने पूछ ही लिया। … अरे जॉब करती हू सूरज आटोमाबाईल्स में एच.आर. मॅनेजर हू। वो दुसरा पच्चास की उम्रवाला आदमी भी चलते चलते इन दोने के पास आकर खडा हो गया। “और अपनी सुनावो तुम क्या करते हो …यहा कैसें?” शौर्या ने अपनी उत्सुकतासे पूछ ही लिया। “शौर्या अपना सेल दिखाना.. ओ हो POCKDI… अरे यार यें तुमभी युझ करती हो ”बिज्रेशने ऍप को दुसरे आदमी के तरफ हाथ करके इशारा से दिखा दिया और उस आदमी ने भी अंगुठे को उपर उठाते हुऐ हलकीसी मुस्कराहट लाए। हा क्या हुआ?,मै नही पुरे 10 मिलियन युझरस है इसके काफी इन्टरेस्टींग अप है” शौर्याने मुस्कराते हूऐ कहा। “इसका फॉन्डर हुऐ में” बिज्रेश ने अपने हंसी को कायम रखते हुऐ बोला। शौर्या थोडी सी हक्कीबक्की रह गई, और अपने आप को सवारते हुऐ बिज्रेशसे पूछा की तुम आज भी झुठ बोलते हो, तूम और इतने अच्छे ऍप के फान्डर। बिज्रेश ने अपनी हंसी को रोखते हूऐ कहा “आजकल झूठ बोलना मना है शौर्या… इन्टरनेट ने सूबकुछ बदल दिया है.. सब लाईफ की रिक्स का खेल है।” उसने शौर्या को मोबाईल लोटाते हुऐ ब्राइझर पर आइ अपनी तस्वीर और नाम की तरफ इशारा करके कहा।
सर …हमें लेट हो रहा है मिटींग के लिए…उस पच्चास की उम्रवाली आदमी ने बिज्रेशसे कहा। ओ.के सो बाय शौर्या …ये मेरा कार्ड..मिलती रहना..सी यू… शौर्या ने गाडी को फिरसे स्टार्ट किया। मोबाईल के ब्राउझर मे अब पच्चास मिलीयन डॉलर की नेटवर्थ वाली कंपनी बिलंदरसिगं नामक अपने ही स्कूल में कॉपी करके पास होनेवाले दोस्त की, है शौर्या के मन में बाते चल रही थी… अहो हो शीट फिरसे वो सुबह वाली रंजितवाली बात उसके मन में फिर से घर कर ने लगी थी। यार मेने तो सबकुछ सही किया लाईफ में फिर भी मैं पीछे कैसे रह गई गयी। क्या मुझे एच.आर. मे नही एन्टरी लेनी चाहिए थी। क्या मेरा ये लक्ष्य नही होना चाहिए था। मेंने भी बहती पानी की तरह बहती गई। ना कभी सोचा की कुछ अलग करु बस बाकी लोगो की तरह एम.बी.ए. किया … कॅम्पस इन्टरव्हयू पास होके तुरंत जॉब… माँ-बाप भी खुश मै भी खुश…शिट यार … मैं इतनी खुश क्यू नही हू।… अरे पगली तू इन्डीपेंडन्ट है। खुद का घर है.. गाडी है… फिर भी यार मुझ में कुछ तो था… शायद मै उसे दूढं नही पाई। मैंने सिर्फं फुचर का साफ-सुधरा आइना देखा… शायद थोडे खराब चहेरे देखानेवाले काच आगे जाके बडी तस्वीर बना देते…
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“अरे हा मार्केट गिरने के circumstance जादा है chiance Currency Devalution का असर भारतीय बाजारों पें भी जरुर दिखेगा, जरुर… चलो मैं फोन रखता हूं” रामचंद्रनजी ने फोन रखा ही था। “अरे शौर्या तुम अभी आ गयी, क्या तबीयत ठीक है ना तुम्हारी… क्या बॉस का बाप मर गया” रामचंद्रने थोडा से मुस्कराते हुऐ कहा। “नही.. वैसी बात नही है, बस मन हुआ जल्दी आ गई” शौर्याने बॅग रखते हुऐ कहा। “अच्छा हुआ आज तू जल्दी आ गई…. वैसे भी सुमा आज नही आनेवाली है….” रामचंद्रनजीने खुरसी पें बैठते हुऐ कहा। “क्यू… क्या हुआ उसे? अरे उसका पति गाव गया है अचानक कोई दूर का रिश्तेदार मर गया उसकी वजहसे तो उसका चायनिज भेल का ठेला सुमा चला रही है तो वो नही आनेवाली है आज…… उसका फोन आया था। “तो मैं बाहर से ही खाना आर्डर कर लेती हू चायनीज, टिप्रंल राईस मंगा लेती हू अच्छा मिलता है” शौर्याने कहा। “ओहो हो ये चायनीज…. बाकी कुछ भी मंगा लेना चायनीज नही… वैसी भी यहा मार्केट उसीने डुबा दिया हुऐ यही बात हजम नही हो रही और उपरसे वही खाना… कुछ और मंगा लेना, देश ऐसे ही बडे नही बनते सिर्फं पैसे की ताकद से उसका डॉमिनस हर तरफ दिखता रहता है, वो खान-पान से लेकर रोजमंराकी जिदंगीपर उतर आता है" रामचंद्रनजी कह रहे थे। शौर्याने पनीर टिक्का ऑर्डर दे दिया पर उसके मन में वही बिलंदर वाली बाते चल रही थी उसके मन की नाराजगी उसके चहरे पें साफ उतर आई थी।
रामचंद्रनजी समज गये की ये कुछ तो बात है जिसें शौर्या का मूड अपसेट है। “क्या हुआ नाराज हो…. ऑफिस में कुछ हुआ क्या? टारगेट से कोई फटकार पडी क्या?” रामचंद्रने अपने कॉरपोरेट जीवन के अनुभवों से अंदाजा लगाकर कह दिया। अब शौर्या अपने आप को काबू में नही रह सकी उसके आखं से अचानक से पानी आ गया और बस वो जोर जोर से रोने लग गई। रामचंद्रनजी थोडासा घबरांते हुऐ पूछां “क्या बात है”। शौर्यां ने सब बात एक-एक करके बता दिई। बिलंदर की सफलता से लेकर रंजित की नोकरी वाली बात तक…. क्या मुझे में सच्च मैं कुछ ऐसा था जिसे मैं आगे बड पाती थी… कुछ तो होगा जिसे मैं नही नाप पाई… मुझे इस बात का दुःख नही या फिर जलन नही की कोई मेरे से आगे निकल गया…. ना ही मुझे उनको पिछे छोडना था पर मुझे हमेशा सबसे उपर रहने का शौक था। अब तक था… पर ये मैं कैसे पिछें रह गई।
रामचंद्रनने मुस्कराते हुऐ कहा की, किसी की एक बात आपके अंदर की चिंगारी भडकाने के लिए काफी है। ये चिंगारी आपको नयी आत्मविश्वास की ज्वाला भडका सकती है या फिर तुम्हे खाक कर छोड देगी। हमने तुम पें कभी किसी चीज को लेकर जोर नही दिया, चाहे वो बात पढाई की हो या फिर रहनेसहने की हो, और मैंने अभी भीं तुम पें शादी के लिए जोर नही दिया। हमने हमेशा तुम्हारे फैसले को ही माना है। तुम्हे मालूम है लोगो के पास हमेशा वक्त होता है सिर्फं आप कर दिखाने की देरी, या तो लोग गाली देते है या फिर ताली… लोग कहते है में एक फंड मॅनेजर हूं तो मुझे हर चीज पैसें में ही दिखती है। तुमने जो बिलंदर और उस लडके की बात किए वो दोन भी पैसे से रिलेटेट है। अगर पैसें से बडा होना है तो दो ही रास्ते है… या तुम ऐसे चीज बेचो जिसकी बाजार में कींमत हो और या फिर तुम्हारी खुद की कींमत होनी चाहिए की तुम नया बाजार खडा कर सको…. मुझे लगता है तुम सही हो… तुम्हे सुबह उठकर काम पर जाकर हर दिन नया और चॅलेजिंग लगता है क्या? … हर पल नया लगता है क्या?… तो तुम सही हो.. और अब तो लाईफ का एक comfort zone बन चुका है। इसे तोडना भी आसान नही होता। मैं आज भी सुबह तीन कंपनियो की बॅलेन्स शीट देखता हूं मुझे उस में सुकून मिलता है। और अंदर से एक हमेशा एक्झाम की तरह एक माहौल रहता है, दिल में हमेशा एक अनबन सी रहती है पेटं मैं हमेशा एक तोफ की गोले जैसा कुछ… कीसी अक्टर को स्टेज परफॉमेंन्स से पहले होने वाली मायूसी जिसें…. वो वाली बात आपके साथ नही हो रही तो समज लेना के आप वही नॉमेल वाली लाईफ जी रहे हो। रोजमंरा की जिदंगी जी कर आनेवाली बेजान चादर उस पे चढी रही रहती है और मुझे लगता है की वो तुम पें नही है। कीसी और के कहने का अपने मन पे जरुर असर होता है… पर अब हमें इसे भी बाहर आना होगा। तुम किस के लाइफ का, रोज की जरुरत का, जीने का हिस्सा हो, कीसी के बडे सपनो का…. तूम लोगो को recruit करती हो उन्हे जीवन के अहम हिस्सा तुम्हारें एक डिसिजन से होता है। जो की अपने आप में ही बडी बात है।
शौर्या को शायद सब जबाब नही मिले थे पर उसे अब पहेले से बेहतर महसूस हो रहा था। अब बिलंदर और रंजित की बात को नए नजरियें से देख रही थी। और खुद को भी। कुछ घंटो पहेले, कल ऑफिस न जाने की बात करने वाली शौर्या अब अपने आपको आईने में देखे के फिरसे एक बार बेस्ट आफ लक कह रही थी।
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“कोई आसिफ नमका कॉम्पुटर आपरेटर है एम्पलीई कोड 15879 हा आपसें मिलना चाहता है… शौर्या मॅडम” रिसेपशनसे फोन आया था। “शौर्या मॅडम, मैं आसिफ, तलोजा प्लॅन्ट मैं काम करता हू” ,एक बडी दाढीवाले पंचीस साल के युवा की थोडीसी धीमी आवाज से खुर्सी सवारतें हुऐ बैठा। “मॅडम अक्चुअली दोन-तीन दिन पहेले ही मुझे इस कंपनी में तीन साल कंप्लीट हो चुके है”, वो मुझे आपको थॅक्स बोलना था…आसिफ के चहेरे पें अचानक से आसूं टपकने लग गए। जब मेंने यहा अप्लाइ कीया था तब मेरे पास graduation
certificate नही होने के कारण प्रोम्बलम थे और मुझे ये जॉब न मिलने के चान्सेस थे तब आप ने ही मुझे recruit किया था बाकी h.r. वालो से झगड कर। शौर्यां को अब तीन साल पहेले की बात याद नही आ रही थी। “अक्चुली मैं जॉब दुढतें दुढतें थक गया था… उस समय लग-भग 8 महिने मे मैनें पच्चासो-एक जगों पर interview दिये थे… पर जॉब नही मिल रहा थी। तो मैंने अपने आप से एक लास्ट होप समजकर इस कंपनी में अप्लाय कीया …. अगर इस कंपनी में सिलेक्शन नही होता तो मैं खुदकशी कर देने वाला था” शौर्या बात सुनकर दंग रह गई। “मैनें तो रस्सी भी लाके रख दिई थी पर ऐसा हुआ नही… थॅक्स शौर्या मॅडम… और ये शादी का कार्ड् अगले संडे शादी है जरुर आना” आसिफने मुस्कराते हुऐ, कार्ड् देते हुऐ कहने लगा। आसिफ की बाते सुनकर उसे अपने ही आप पें हसी आ रही थी। कल तक में क्या सोच रही थी अपनी बारे में और झटसे उसे अपने पिताजी की बात याद आ गई। “मॅडम मै चलता हू, ये मेरी तरफ से छोटासा तोफा” आसिफ ने डेक्स पर रॅप कीया बॉक्स रख कर चला गया।
“जहा तक मेरा अनुमान हे अब कोई चिंता की बात नही है अब माकॅट को अपसाईड जाने से कोई रोक नही सकता, चलीए रखता हूं वैसे भी में दो दिन में आ रहा हूं” रामचंद्रने अपना फोन रख दिया। thank you thank you
so much पापा….i love you dad… शौर्या अपने पापासे आके लिपट गई और आसिफ वाली बात बता दिई। न जाने क्यूं पर अब रामचंद्रनजी के आखों से पानी आ गया।….”शायद कभी कभी अपनी खुद की किमंत गलत बाजार में देखेने लगते है… थोडासा वक्त का इंतजार आपको जरुर अपने आपसे रुबरु होने मे और सही किमंत सही बाजार में मिलने में मदत कर देता है” शौर्या ने रॅपर खोलते हुऐ गणेशमूर्ती को टेबल पर रखते हुऐ बोल पडी। “चलो मेरे साथ रह कर तुम मार्केटवाली भाषा में बोलने लगी हो” रामचंद्रनने शौर्या के सर पे हाथ फिराकर मुस्कराते हुऐ कह दिया।
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-आशिष गुरव .
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